भारत मसाला और कृषि व्यापार रिपोर्ट 2026
इस साल मसाला और कृषि व्यापार में सबसे दिलचस्प बात क्या रही?
एक तरफ कुछ commodities ने exporters को अच्छा मुनाफा दिया, वहीं दूसरी तरफ कई पुराने मजबूत बाजार अचानक सुस्त पड़ गए। सबसे ज्यादा फर्क पड़ा global demand, freight cost और डॉलर की चाल से।
राजस्थान, गुजरात और कोच्चि के पुराने व्यापारियों से बात करें तो लगभग सभी की राय एक जैसी है —
“अब market सिर्फ production से नहीं चलता, international buying mood ज्यादा बड़ा factor बन चुका है।”
जीरा – माल है, लेकिन buyers उतने aggressive नहीं
जीरा export इस बार उम्मीद से कमजोर रहा। घरेलू बाजार में ऊंचे भाव और Middle East buying की सुस्ती का असर साफ दिखाई दिया।
Whole Jeera Export
2024-25 की तुलना में:
🔻 करीब 31,000 MT की कमी
कई exporters का कहना है कि international buyers लगातार lower price quotes मांग रहे थे, जबकि भारत में rates आसानी से नीचे नहीं आए।
Ground Cumin भी दबाव में
पीसे हुए जीरे के export में भी:
🔻 लगभग 1700 MT गिरावट
इससे साफ है कि processed spice segment भी पूरी तरह मजबूत नहीं रहा।
हल्दी – उतार-चढ़ाव के बीच भी टिके buyers
हल्दी बाजार ने इस साल बाकी मसालों की तुलना में बेहतर stability दिखाई।
Export में बहुत बड़ी तेजी नहीं आई, लेकिन buyers market से पूरी तरह बाहर भी नहीं हुए।
खासतौर पर South India और Maharashtra की अच्छी quality turmeric की demand बनी रही।
व्यापारियों का अनुभव
- International enquiries steady रहीं
- Processed turmeric demand बनी रही
- Health products sector से support मिला
पुराने exporters हल्दी को अभी भी “safe spice segment” मान रहे हैं।
मिर्च व्यापार – powder बचा, seeds कमजोर पड़े
मिर्च powder export पूरी तरह टूटा नहीं, लेकिन growth भी नहीं दिखी।
Premium processed chilli की demand stable रही, खासकर food industry में।
लेकिन chilli seeds market में कमजोरी ज्यादा दिखाई दी।
कई देशों में cultivation demand धीमी रहने से seed export काफी प्रभावित हुआ।
धनिया – धीरे-धीरे वापसी की कोशिश
धनिया export में हल्की recovery जरूर दिखी, लेकिन market अभी भी पूरी तरह confident नहीं माना जा रहा।
कुछ exporters का कहना है कि lower price buying support जरूर दिखा, लेकिन बड़े orders अभी भी limited हैं।
मेथी – इस साल का surprise performer
अगर पूरे spice export sector में किसी commodity ने सबसे ज्यादा positive surprise दिया है, तो वह मेथी रही।
Middle East और health food sector की demand ने इस market को काफी support दिया।
मेथी मजबूत क्यों रही?
- Health food products में usage बढ़ा
- Processed food industry active रही
- Export enquiries लगातार बनी रहीं
राजस्थान के कई traders अब मेथी को “stable export counter” मानने लगे हैं।
सौंफ और related seeds – competition बढ़ा
सौंफ और Caraway Seeds market इस साल दबाव में दिखाई दिया।
International competition बढ़ने से Indian exporters को pricing pressure झेलना पड़ा।
ऊपर से freight cost ने margins और कमजोर कर दिए।
काली मिर्च – import side पर सुस्ती
Black Pepper import इस साल कमजोर रहा।
Importers लगातार cautious mood में दिखाई दिए। Domestic buyers भी जरूरत के हिसाब से ही खरीद करते रहे।
कई traders का मानना है कि global pepper prices और Indian domestic market के बीच gap भी buying को प्रभावित कर रहा है।
बादाम और काजू – demand लगातार मजबूत
Dry fruit segment में सबसे ज्यादा मजबूती बादाम और काजू में दिखाई दी।
बादाम (Almonds)
Import में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज हुई। Premium food consumption लगातार बढ़ रहा है।
काजू (Cashew)
Processing industries और festive demand ने market को मजबूत support दिया।
कई importers का कहना है कि premium snack category अभी भी तेजी से grow कर रही है।
Oats – health trend ने market बदल दिया
Oats import में इस साल जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
Health-conscious consumers और packaged food companies लगातार demand बढ़ा रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि oats अब केवल metro cities तक सीमित नहीं रहा। Tier-2 cities में भी demand बढ़ रही है।
इसबगोल और किशमिश – buyers संभलकर चल रहे
इसबगोल
Export में गिरावट दिखाई दी। International competition और freight pressure बड़ा कारण रहे।
किशमिश (Raisins)
Global dried fruit market इस समय दबाव में दिखाई दे रहा है। Export demand पहले जैसी मजबूत नहीं रही।
इस साल कौन मजबूत रहा और कौन दबाव में?
| Commodity | स्थिति |
|---|---|
| मेथी | सबसे मजबूत |
| बादाम | मजबूत |
| काजू | मजबूत |
| Oats | तेजी |
| हल्दी | Stable Positive |
| धनिया | हल्की recovery |
| जीरा | दबाव |
| काली मिर्च | कमजोर |
| सौंफ | Bearish |
| इसबगोल | Weak |
| किशमिश | कमजोर |
इस साल market को सबसे ज्यादा किसने प्रभावित किया?
व्यापारियों के अनुसार 2025-26 में ये factors सबसे ज्यादा भारी पड़े:
- Global shipping cost
- Middle East crisis
- Dollar fluctuations
- Freight pressure
- Export orders की सुस्ती
- Domestic stock position
पुराने व्यापारियों की साफ राय
अब वही commodity मजबूत चल रही है जहां:
- stock limited है
- और export demand लगातार बनी हुई है
बाकी markets में buyers काफी selective हो चुके हैं।
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निष्कर्ष
2025-26 का साल भारतीय मसाला और कृषि व्यापार के लिए पूरी तरह uneven रहा।
जहां मेथी, बादाम और काजू जैसे segments ने मजबूती दिखाई, वहीं जीरा, काली मिर्च और इसबगोल जैसे बाजार दबाव में बने रहे।
फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही है:
“अब market सिर्फ production नहीं, बल्कि global demand और logistics के हिसाब से चल रहा है।”
Disclaimer: यह रिपोर्ट व्यापारिक जानकारी और बाजार चर्चा के आधार पर तैयार की गई है। खरीद-बिक्री से पहले अपने स्तर पर जांच अवश्य करें।
