गर्मी, पानी और भाव… किसान ने बदला फसल का हिसाब | Summer Crops Sowing Report 2026
इस साल गर्मी ने खेती का पूरा गणित बदल दिया है। कई इलाकों में किसान अब सिर्फ परंपरा देखकर फसल नहीं चुन रहे, बल्कि पानी, लागत और बाजार भाव — तीनों को साथ में तौलकर फैसला ले रहे हैं।
22 मई 2026 तक के ताजा आंकड़े यही कहानी बता रहे हैं। देश में कुल ग्रीष्मकालीन बुवाई बढ़ी जरूर है, लेकिन तस्वीर हर फसल में एक जैसी नहीं दिख रही।
धान पीछे छूटा है… जबकि उड़द, मक्का और तिलहन फसलें तेजी से आगे बढ़ी हैं।
कुल बुवाई बढ़ी, लेकिन असली कहानी अंदर छिपी है
| वर्ष | कुल बुवाई क्षेत्र (लाख हेक्टेयर) |
|---|---|
| 2025 | 83.50 |
| 2026 | 86.02 |
यानी कुल मिलाकर करीब 2.5 लाख हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में बुवाई हुई है। लेकिन यह बढ़त मुख्य रूप से उन फसलों में आई है जहां पानी कम लगता है या बाजार बेहतर दिखाई दे रहा है।
धान की खेती में किसानों ने हाथ थोड़ा पीछे खींचा
सबसे ज्यादा चर्चा धान को लेकर है। पिछले साल की तुलना में इस बार धान की बुवाई कम रही।
| फसल | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| धान | 32.42 | 31.05 |
करीब 1.37 लाख हेक्टेयर की कमी छोटी बात नहीं मानी जा रही।
कई किसानों का कहना है कि पानी को लेकर uncertainty बढ़ी है। ऊपर से लगातार heatwave ने भी धान जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों को जोखिम वाला बना दिया है।
- मानसून की अनिश्चितता
- बढ़ती सिंचाई लागत
- तेज गर्मी
- कम पानी वाली फसलों की तरफ रुझान
इन वजहों से कई इलाकों में किसान अब विकल्प तलाश रहे हैं।
उड़द ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा
दालों में सबसे बड़ा बदलाव उड़द में देखने को मिला।
| फसल | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| उड़द | 3.58 | 4.60 |
करीब 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की बढ़त सीधे संकेत देती है कि किसान अब कम लागत वाली फसलों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
व्यापारियों की भाषा में कहें तो — “उड़द इस बार किसान की practical crop बनती जा रही है।”
उड़द में रुझान बढ़ने की वजह
- कम पानी की जरूरत
- कम लागत
- बाजार भाव बेहतर
- heatwave risk comparatively कम
मक्का की तरफ किसानों का झुकाव तेजी से बढ़ा
इस साल अगर किसी फसल ने सबसे ज्यादा चौंकाया है, तो वह मक्का है।
| फसल | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| मक्का | 8.50 | 10.00 |
करीब 1.5 लाख हेक्टेयर की बढ़त बताती है कि market demand किसानों को साफ दिखाई दे रही है।
पोल्ट्री, starch industry और ethanol sector की मांग ने मक्का को इस समय मजबूत commercial crop बना दिया है।
कई मंडियों में व्यापारी पहले से ही अनुमान लगा रहे हैं कि अगर मौसम ठीक रहा तो इस बार maize supply काफी मजबूत आ सकती है।
तिलहन फसलें भी रफ्तार पकड़ रही हैं
तिलहन क्षेत्र में भी इस बार अच्छी बढ़त दर्ज हुई है।
| तिलहन क्षेत्र | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| कुल क्षेत्र | 9.58 | 11.04 |
सबसे ज्यादा चर्चा मूंगफली को लेकर हो रही है।
| फसल | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| मूंगफली | 4.20 | 5.51 |
लगभग 1.31 लाख हेक्टेयर की बढ़त सीधे दिखाती है कि edible oil market का असर खेत तक पहुंच चुका है।
किसानों को लग रहा है कि आने वाले महीनों में तेलहन बाजार मजबूत रह सकता है।
मौसम अब खेती का सबसे बड़ा फैक्टर बन चुका है
इस बार एक चीज साफ दिखाई दे रही है — किसान अब मौसम को पहले से ज्यादा गंभीरता से लेने लगे हैं।
कई इलाकों में लगातार गर्मी और पानी की कमी ने cropping pattern बदलना शुरू कर दिया है।
पुराने किसान कहते हैं:
“अब खेती सिर्फ जमीन से नहीं, मौसम के मूड से चल रही है।”
आगे बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर मानसून सामान्य रहा तो:
- मक्का और दालों की supply मजबूत रह सकती है
- तिलहन बाजार को राहत मिल सकती है
- feed industry को फायदा हो सकता है
लेकिन अगर बारिश कमजोर रही, तो:
- धान बाजार मजबूत हो सकता है
- rice prices में तेजी बन सकती है
- oilseed volatility बढ़ सकती है
व्यापारियों की नजर अब किस पर है?
फिलहाल मंडियों और commodity markets की नजर सिर्फ एक चीज पर टिकी है — मानसून।
क्योंकि अभी की बुवाई केवल शुरुआती संकेत दे रही है। असली तस्वीर जून और जुलाई की बारिश तय करेगी।
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निष्कर्ष
2026 की summer sowing report यह साफ दिखा रही है कि किसान अब बदलते मौसम के हिसाब से तेजी से फैसले ले रहे हैं।
धान जैसी पारंपरिक फसलों से थोड़ा हटकर अब ज्यादा focus:
- उड़द
- मक्का
- तिलहन
जैसी फसलों पर दिखाई दे रहा है।
आने वाले हफ्तों में मानसून की चाल ही तय करेगी कि यह बढ़ी हुई बुवाई बाजार में राहत लाएगी या फिर मौसम की मार नई चिंता खड़ी करेगी।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न सरकारी आंकड़ों, कृषि बाजार स्रोतों और व्यापारिक चर्चाओं के आधार पर तैयार की गई है। वास्तविक बाजार स्थिति समय और क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।
