भारत में चना, मसूर और उड़द उत्पादन 2025-26: किस दाल में बढ़ी पैदावार और किसमें आई कमी?

 

भारत में चना, मसूर और उड़द उत्पादन 2025-26: किस दाल में बढ़ी पैदावार और किसमें आई कमी?

दाल बाजार में अब एक जैसा ट्रेंड नहीं चलेगा, चना, मसूर और उड़द तीनों की कहानी अलग

दलहन बाजार को समझने वाले पुराने व्यापारी एक बात अक्सर कहते हैं—"हर दाल की अपनी चाल होती है।" 2025-26 के तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान को देखने के बाद यह बात फिर सही साबित होती दिखाई दे रही है।

इस बार उत्पादन आंकड़े बताते हैं कि चना, मसूर और उड़द तीनों अलग-अलग दिशा में खड़े हैं। कहीं रिकॉर्ड उत्पादन है, कहीं संतुलित स्थिति है और कहीं उत्पादन में गिरावट बाजार को नया सहारा दे सकती है।

ऐसे में आने वाले महीनों में पूरे दाल बाजार को एक नजर से देखना शायद सही रणनीति नहीं होगी।

चना उत्पादन ने बढ़ाई आपूर्ति की उम्मीद

इस वर्ष चना उत्पादन का अनुमान 125.14 लाख टन लगाया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह लगभग 111.14 लाख टन रहा था। यानी करीब 12.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अच्छी पैदावार और बेहतर क्षेत्रफल ने कुल उत्पादन को मजबूत बनाया है।

हालांकि बाजार केवल उत्पादन से नहीं चलता। सरकारी खरीद, स्टॉकिस्टों की रणनीति और उपभोक्ता मांग भी आगे की दिशा तय करेंगी।

कृषि जिंसों के उत्पादन रुझानों को समझने के लिए हमारी सरसों उत्पादन रिपोर्ट 2025-26 भी पढ़ सकते हैं।

मसूर ने दिखाई संतुलित मजबूती

मसूर उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान के अनुसार इस साल उत्पादन 17.62 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह 16.54 लाख टन था।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश इस वृद्धि के प्रमुख केंद्र रहे हैं। हालांकि बिहार और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में उत्पादन दबाव में रहा।

मसूर के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्पादन बढ़ा जरूर है, लेकिन इतनी तेजी से नहीं कि बाजार में भारी दबाव बन जाए।

यही कारण है कि मसूर फिलहाल संतुलित दाल के रूप में देखी जा रही है।

उड़द बनी सबसे दिलचस्प कहानी

दलहन रिपोर्ट का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा उड़द है।

उड़द उत्पादन पिछले वर्ष के 22.42 लाख टन से घटकर लगभग 21.60 लाख टन रहने का अनुमान है। कुल गिरावट लगभग 3.66 प्रतिशत बताई जा रही है।

महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में खरीफ उड़द का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा।

हालांकि रबी और ग्रीष्मकालीन उड़द ने कुछ राहत जरूर दी, लेकिन कुल उत्पादन में कमी को पूरी तरह संतुलित नहीं कर सके।

यही वजह है कि कई अनुभवी व्यापारी उड़द को फिलहाल सबसे मजबूत फंडामेंटल वाली दाल मान रहे हैं।

मंडी के जानकार क्या कह रहे हैं?

बाजार में चर्चा का केंद्र अब केवल उत्पादन नहीं है। व्यापारी आने वाले मानसून, आयात नीति और सरकारी हस्तक्षेप पर भी नजर रखे हुए हैं।

  • चना में फिलहाल पर्याप्त उपलब्धता दिखाई दे रही है।
  • मसूर संतुलित स्थिति में बनी हुई है।
  • उड़द में उत्पादन कमी आगे समर्थन दे सकती है।
  • मानसून की चाल बाजार की सोच बदल सकती है।

हाल के कृषि बाजार रुझानों को समझने के लिए बीकानेर मंडी तुलना रिपोर्ट भी उपयोगी साबित हो सकती है।

आगे बाजार किन संकेतों पर चलेगा?

अगले कुछ महीनों में दाल बाजार पर इन प्रमुख कारकों का प्रभाव देखने को मिल सकता है:

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति
  • सरकारी खरीद अभियान
  • दलहन आयात की स्थिति
  • घरेलू खपत का स्तर
  • बड़े व्यापारिक स्टॉक की स्थिति

अगर मौसम सामान्य रहता है तो उत्पादन अनुमान बाजार को संतुलित रख सकते हैं। लेकिन मानसून में किसी प्रकार की बाधा कीमतों को नई दिशा दे सकती है।

एक नजर में उत्पादन तुलना

फसल 2024-25 2025-26 बदलाव
चना 111.14 लाख टन 125.14 लाख टन +12.6%
मसूर 16.54 लाख टन 17.62 लाख टन +6.53%
उड़द 22.42 लाख टन 21.60 लाख टन -3.66%

निष्कर्ष

तीसरे अग्रिम अनुमान से एक बात साफ दिखाई देती है कि दलहन बाजार में अब एक जैसा ट्रेंड देखने को नहीं मिलेगा।

चना में आपूर्ति मजबूत रहने की संभावना है, मसूर संतुलित स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि उड़द उत्पादन में कमी के कारण अपेक्षाकृत मजबूत फंडामेंटल के साथ खड़ी है।

अब बाजार की अगली बड़ी दिशा मानसून, सरकारी नीतियों और आयात गतिविधियों से तय होगी। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह दलहन व्यापार के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


यह भी पढ़ें:

Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न बाजार स्रोतों, मौसम संकेतों और व्यापारिक चर्चाओं के आधार पर तैयार की गई है। व्यापारिक निर्णय लेने से पहले अपने स्तर पर जांच अवश्य करें।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने