चना आयात में 46% की भारी कमी, ऑस्ट्रेलिया पर भारत की निर्भरता बरकरार
भारत के चना बाजार से जुड़ी एक अहम तस्वीर सामने आई है। जनवरी से जून 2026 के बीच देश में चने का आयात पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी कम रहा। उपलब्ध वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस छह महीने की अवधि में भारत ने करीब 6.35 लाख टन चना आयात किया, जबकि जनवरी-जून 2025 में यह मात्रा लगभग 11.67 लाख टन थी।
यानी एक साल में आयात में करीब 5.32 लाख टन की कमी आई है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो गिरावट लगभग 45.6% बैठती है, जिसे रिपोर्ट में करीब 46% बताया गया है।
यह आंकड़ा चना बाजार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आयात भारत की कुल उपलब्धता और सप्लाई बैलेंस का एक हिस्सा है।
छह महीने में कितना बदला चना आयात?
जनवरी-जून 2025 में भारत का कुल चना आयात 11,66,609.69 मीट्रिक टन था। 2026 की समान अवधि में यह घटकर 6,34,937.63 मीट्रिक टन रह गया।
मतलब करीब 5,31,672 मीट्रिक टन की कमी।
| अवधि | चना आयात |
|---|---|
| जनवरी-जून 2025 | 11,66,609.69 MT |
| जनवरी-जून 2026 | 6,34,937.63 MT |
| अंतर | 5,31,672.06 MT |
| अनुमानित गिरावट | 45.6% |
इससे साफ है कि साल के शुरुआती छह महीनों में आयातित चने की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में काफी नीचे रही।
जनवरी से मार्च में रही सबसे बड़ी कमजोरी
महीनेवार आंकड़ों को देखें तो 2026 के पहले तीन महीनों में आयात में खासा अंतर दिखाई देता है।
जनवरी 2026 में करीब 2,52,426 टन चना भारत आया, जबकि जनवरी 2025 में यह मात्रा 5,03,479 टन से अधिक थी।
फरवरी में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। 2026 में आयात करीब 1,25,965 टन रहा, जबकि एक साल पहले यह लगभग 3,80,915 टन था।
मार्च 2026 में आयात बढ़कर 1,92,154 टन के आसपास रहा, लेकिन मार्च 2025 के 2,61,235 टन के मुकाबले यह भी कम था।
इस तरह जनवरी से मार्च तक बनी कमी ने पूरे छह महीने के आंकड़े को काफी नीचे खींच दिया।
अप्रैल से जून में आयात की रफ्तार बदली
साल की दूसरी तिमाही में स्थिति थोड़ी अलग दिखाई देती है। अप्रैल, मई और जून 2026 में चना आयात पिछले साल की समान अवधि से अधिक रहा।
अप्रैल 2026 में भारत ने करीब 26,394 टन चना आयात किया, जबकि अप्रैल 2025 में यह मात्रा 14,337 टन के आसपास थी।
मई 2026 में आयात करीब 20,063 टन रहा। पिछले साल मई में यह सिर्फ 4,608 टन के आसपास था।
इसी तरह जून 2026 में लगभग 17,936 टन चना आयात हुआ, जबकि जून 2025 में यह मात्रा करीब 2,036 टन थी।
इससे संकेत मिलता है कि दूसरी तिमाही में आयात गतिविधि में सुधार आया, लेकिन शुरुआती तीन महीनों की बड़ी कमी की भरपाई नहीं हो सकी।
चना आयात में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे
देशवार आंकड़ों में एक बात विशेष रूप से सामने आती है। जनवरी-जून 2026 के दौरान भारत के चना आयात में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही।
इस अवधि में ऑस्ट्रेलिया से करीब 6,03,787 टन चना भारत आया। इसके बाद तंजानिया का स्थान रहा, जहां से लगभग 28,743 टन चना आयात हुआ।
इसके अलावा यूके से करीब 862 टन और बर्मा से लगभग 792 टन आयात दर्ज किया गया। अन्य देशों की हिस्सेदारी भी बेहद सीमित रही।
इससे यह भी पता चलता है कि इस अवधि में भारतीय आयात बाजार काफी हद तक ऑस्ट्रेलियाई चने पर निर्भर रहा।
क्या कम आयात से घरेलू बाजार मजबूत होगा?
यह सवाल चना कारोबार से जुड़े लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
आयात में बड़ी कमी का मतलब यह है कि विदेशी स्रोतों से आने वाली सप्लाई पिछले साल की तुलना में कम रही। अगर आने वाले महीनों में भी आयात सीमित रहता है, तो घरेलू बाजार में उपलब्धता पर इसका असर पड़ सकता है।
लेकिन सिर्फ आयात के आंकड़े देखकर चने की कीमतों की दिशा तय करना सही नहीं होगा।
बाजार पर घरेलू उत्पादन, मंडियों की आवक, सरकारी स्टॉक, दाल मिलों की खरीद, उपभोक्ता मांग और नए आयात सौदों का भी असर पड़ेगा।
इसलिए आयात में गिरावट को बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे अकेले तेजी या मंदी का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
चना बाजार के लिए आगे किन बातों पर नजर रहेगी?
आने वाले समय में चना बाजार को समझने के लिए कुछ प्रमुख संकेतकों पर नजर रखना जरूरी होगा।
सबसे पहले यह देखना होगा कि विदेशी चने के नए सौदे किस गति से होते हैं। इसके साथ ऑस्ट्रेलिया से होने वाली सप्लाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।
दूसरी तरफ घरेलू मंडियों में आवक और किसानों की बिक्री की रफ्तार बाजार की उपलब्धता को प्रभावित करेगी। दाल मिलों की मांग और त्योहारी सीजन के दौरान खपत बढ़ने पर भी बाजार का संतुलन बदल सकता है।
सरकारी स्टॉक और नीतिगत फैसले भी चना बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं?
जनवरी-जून 2026 के आंकड़ों से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत ने पिछले साल की तुलना में काफी कम चना आयात किया है।
करीब 11.67 लाख टन से घटकर 6.35 लाख टन पर आया आयात एक बड़ा अंतर है। हालांकि अप्रैल से जून के दौरान आयात में तेजी जरूर दिखाई दी, लेकिन वह शुरुआती महीनों की कमी को पूरी तरह भरने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
इसलिए आने वाले महीनों में अगर आयात की रफ्तार बढ़ती है तो सप्लाई का दबाव कुछ कम हो सकता है। वहीं आयात कमजोर रहने की स्थिति में घरेलू बाजार की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
निष्कर्ष
जनवरी से जून 2026 के बीच भारत का चना आयात करीब 6.35 लाख टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 11.67 लाख टन से काफी कम है।
करीब 5.32 लाख टन की कमी और लगभग 45.6% की गिरावट चना बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
इस अवधि में ऑस्ट्रेलिया सबसे बड़ा आयात स्रोत रहा, जबकि तंजानिया दूसरे स्थान पर रहा। अब आगे बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू उत्पादन, मंडी आवक और विदेशी आयात के बीच संतुलन किस तरह बनता है।
स्रोत: उपलब्ध 15 अगस्त 2026 के वाणिज्य विभाग आधारित आंकड़े। सभी मात्रा मीट्रिक टन (MT) में हैं। यह लेख उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण है और इसे निवेश या व्यापार की सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
“लेकिन सिर्फ आयात के आंकड़े देखकर चने की कीमतों की दिशा तय करना सही नहीं होगा। बाजार पर घरेलू उत्पादन, मंडियों की आवक और दाल मिलों की मांग का भी असर पड़ता है।”
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध बाजार एवं आयात आंकड़ों पर आधारित है। आंकड़ों में बदलाव संभव है। इसे निवेश, खरीद-बिक्री या व्यापारिक निर्णय की सलाह न माना जाए।
