मसाला निर्यात की तस्वीर बदली, हल्दी आगे तो जीरा और मिर्च में बड़ी गिरावट
भारत के मसाला कारोबार के लिए अप्रैल से जून 2026-27 का निर्यात आंकड़ा कई महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है। कुछ मसालों की विदेशी मांग में सुधार देखने को मिला है, जबकि दूसरी तरफ जीरा, लाल मिर्च, धनिया और इलायची जैसे प्रमुख उत्पादों के निर्यात में कमी दर्ज हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हल्दी और धनिया क्रश्ड/ग्राउंड उन चुनिंदा मसालों में रहे जिनका निर्यात पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले बढ़ा। इसके विपरीत मिर्च बीज और जीरा क्रश्ड/ग्राउंड में सबसे बड़ी प्रतिशत गिरावट दिखाई दी।
यह तुलना अप्रैल-जून 2025-26 और अप्रैल-जून 2026-27 के निर्यात आंकड़ों पर आधारित है और सभी मात्रा मीट्रिक टन में दी गई है।
अप्रैल-जून में मसालों के निर्यात की पूरी तस्वीर
| मसाला | 2025-26 | 2026-27 | बदलाव | प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| हल्दी | 47,950 MT | 51,986 MT | +4,036 | +8.42% |
| जीरा क्रश्ड/ग्राउंड | 15,621 MT | 3,772 MT | -11,849 | -75.85% |
| सौंफ/कारावे बीज | 8,527 MT | 7,794 MT | -733 | -8.60% |
| मेथीदाना | 11,922 MT | 9,637 MT | -2,285 | -19.17% |
| जीरा साबुत | 59,248 MT | 44,144 MT | -15,104 | -25.49% |
| मिर्च बीज | 2,457 MT | 34 MT | -2,423 | -98.62% |
| मिर्च पाउडर | 19,604 MT | 16,647 MT | -2,957 | -15.08% |
| अन्य धनिया बीज | 15,608 MT | 10,991 MT | -4,617 | -29.58% |
| धनिया क्रश्ड/ग्राउंड | 3,114 MT | 3,343 MT | +229 | +7.35% |
| लाल मिर्च / Capsicum | 177,158 MT | 114,741 MT | -62,417 | -35.23% |
| धनिया बीज | 15,986 MT | 11,213 MT | -4,773 | -29.86% |
| इलायची | 3,281.13 MT | 2,514.80 MT | -766.33 | -23.36% |
हल्दी ने दिखाई मजबूती
इस अवधि में सबसे सकारात्मक तस्वीर हल्दी निर्यात की रही।
अप्रैल-जून 2025-26 में भारत से 47,950 MT हल्दी का निर्यात हुआ था। इसी अवधि में 2026-27 में यह मात्रा बढ़कर 51,986 MT हो गई।
यानी करीब 4,036 MT की बढ़ोतरी हुई और निर्यात में 8.42% का इजाफा दर्ज किया गया।
यह आंकड़ा बताता है कि इस अवधि में भारतीय हल्दी की विदेशी मांग में कुछ मजबूती बनी रही।
धनिया क्रश्ड में भी मामूली बढ़त
धनिया के पूरे बाजार में जहां कई श्रेणियों में निर्यात कम हुआ, वहीं धनिया क्रश्ड/ग्राउंड ने थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया।
इस श्रेणी का निर्यात 3,114 MT से बढ़कर 3,343 MT हो गया। मात्रा के हिसाब से बढ़ोतरी 229 MT रही, जबकि प्रतिशत आधार पर यह करीब 7.35% है।
हालांकि बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन बाकी धनिया श्रेणियों की तुलना में यह एक सकारात्मक संकेत जरूर है।
मिर्च बीज में सबसे बड़ी प्रतिशत गिरावट
निर्यात आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाला बदलाव मिर्च बीज में दिखाई देता है।
2025-26 के अप्रैल-जून में इसका निर्यात 2,457 MT था, जो 2026-27 में घटकर सिर्फ 34 MT रह गया।
इस तरह मात्रा में करीब 2,423 MT की कमी आई और प्रतिशत गिरावट लगभग 98.62% रही।
यह गिरावट बाकी मसाला श्रेणियों की तुलना में काफी ज्यादा है और इसलिए इस आंकड़े पर बाजार से जुड़े लोगों की विशेष नजर रह सकती है।
जीरा निर्यात भी दबाव में
जीरा बाजार के लिए भी निर्यात आंकड़े बहुत उत्साहजनक नहीं रहे।
जीरा क्रश्ड/ग्राउंड का निर्यात 15,621 MT से घटकर 3,772 MT रह गया। यानी करीब 11,849 MT की कमी और 75.85% की गिरावट दर्ज हुई।
दूसरी तरफ साबुत जीरा का निर्यात भी 59,248 MT से घटकर 44,144 MT रह गया। इसमें करीब 15,104 MT की कमी हुई और प्रतिशत आधार पर गिरावट 25.49% रही।
इससे पता चलता है कि अप्रैल-जून अवधि में जीरे की दोनों प्रमुख निर्यात श्रेणियों में पिछले साल की तुलना में कमजोरी रही।
लाल मिर्च में सबसे बड़ी मात्रा की कमी
लाल मिर्च या Capsicum का निर्यात मात्रा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। 2025-26 की अप्रैल-जून अवधि में इसका निर्यात 1,77,158 MT था।
2026-27 में यह घटकर 1,14,741 MT रह गया।
यानी एक साल में करीब 62,417 MT की कमी हुई। प्रतिशत के हिसाब से निर्यात लगभग 35.23% नीचे रहा।
क्योंकि लाल मिर्च की कुल निर्यात मात्रा कई अन्य मसालों से काफी ज्यादा है, इसलिए इसमें आया बदलाव पूरे मसाला व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
धनिया और मेथीदाना में भी कमी
धनिया बीज का निर्यात 15,986 MT से घटकर 11,213 MT रहा। यानी करीब 4,773 MT की कमी और 29.86% की गिरावट।
इसी तरह अन्य धनिया बीज श्रेणी में निर्यात 15,608 MT से घटकर 10,991 MT हो गया। इसमें करीब 29.58% की कमी दर्ज हुई।
मेथीदाना का निर्यात भी 11,922 MT से घटकर 9,637 MT रह गया। इस श्रेणी में करीब 19.17% की गिरावट आई।
इलायची और सौंफ भी कमजोर
अप्रैल-जून 2026-27 के आंकड़ों में इलायची का निर्यात 2,514.80 MT रहा, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 3,281.13 MT था।
इस तरह इलायची निर्यात में करीब 23.36% की कमी आई।
सौंफ/कारावे बीज की बात करें तो निर्यात 8,527 MT से घटकर 7,794 MT रहा। इसमें करीब 8.60% की गिरावट दर्ज की गई।
मिर्च पाउडर का निर्यात भी 19,604 MT से घटकर 16,647 MT रहा, यानी लगभग 15.08% कम।
मसाला बाजार के लिए इन आंकड़ों का क्या संकेत है?
इन आंकड़ों को एक साथ देखें तो तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। जहां कुछ उत्पादों की विदेशी मांग बेहतर हुई है, वहीं कई महत्वपूर्ण मसालों के निर्यात में कमी आई है।
हल्दी का बढ़ता निर्यात भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। दूसरी तरफ जीरा और लाल मिर्च जैसे बड़े मसाला कारोबार में निर्यात घटने से बाजार की मांग को लेकर सवाल जरूर उठते हैं।
हालांकि निर्यात में कमी का सीधा मतलब यह नहीं है कि घरेलू बाजार में कीमतें निश्चित रूप से गिरेंगी या बढ़ेंगी। कीमतों पर घरेलू उत्पादन, मंडी आवक, उपलब्ध स्टॉक, प्रोसेसिंग उद्योग की मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारकों का असर रहता है।
आगे किन आंकड़ों पर रहेगी नजर?
आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि मसाला निर्यात में अप्रैल-जून वाला रुझान आगे भी जारी रहता है या स्थिति में बदलाव आता है।
विशेष रूप से जीरा, लाल मिर्च, हल्दी और धनिया के अगले निर्यात आंकड़े बाजार की दिशा समझने में उपयोगी हो सकते हैं।
अगर कमजोर निर्यात वाले मसालों में विदेशी मांग दोबारा बढ़ती है, तो बाजार की तस्वीर बदल सकती है। वहीं लगातार कमजोर निर्यात से घरेलू उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगी।
निष्कर्ष
अप्रैल-जून 2026-27 के मसाला निर्यात आंकड़े भारतीय मसाला बाजार में अलग-अलग उत्पादों की अलग तस्वीर दिखाते हैं।
हल्दी का निर्यात 8.42% और धनिया क्रश्ड/ग्राउंड का 7.35% बढ़ा, जबकि मिर्च बीज, जीरा क्रश्ड, लाल मिर्च, जीरा साबुत, धनिया, मेथीदाना और इलायची समेत कई उत्पादों में गिरावट दर्ज हुई।
सबसे बड़ी प्रतिशत गिरावट मिर्च बीज में 98.62% रही, जबकि मात्रा के लिहाज से लाल मिर्च में 62,417 MT की कमी सबसे प्रमुख आंकड़ों में शामिल है।
आने वाले महीनों में निर्यात के साथ घरेलू आवक, स्टॉक और अंतरराष्ट्रीय मांग को साथ देखकर ही मसाला बाजार की सही तस्वीर सामने आएगी।
नोट: यह लेख अप्रैल-जून 2025-26 और अप्रैल-जून 2026-27 के उपलब्ध आंकड़ों की तुलना पर आधारित है। सभी मात्रा MT में हैं और प्रतिशत बदलाव 2025-26 को आधार मानकर निकाला गया है। अलग-अलग HS Code और उत्पाद श्रेणियों को अलग रखा गया है।
