अगस्त में सोयाबीन तेल आयात बढ़ने की संभावना, सूरजमुखी तेल की सप्लाई घटने से भारत की खरीद बढ़ी
18 अगस्त 2026 | खाद्य तेल बाजार की खबर
भारत के खाद्य तेल बाजार में अगस्त महीने के दौरान सोयाबीन तेल की खरीद बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में भारत का सोयाबीन तेल आयात करीब 6.20 लाख टन तक पहुंच सकता है। यदि यह अनुमान सही रहता है, तो यह मौजूदा मार्केटिंग वर्ष के औसत मासिक आयात करीब 4.25 लाख टन से लगभग 46 फीसदी ज्यादा होगा।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई को माना जा रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव के कारण ब्लैक सी क्षेत्र से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे माहौल में भारतीय खरीदार सूरजमुखी तेल के विकल्प के तौर पर सोयाबीन तेल की तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं।
सूरजमुखी तेल की उपलब्धता बनी चिंता
अगस्त में भारत का सूरजमुखी तेल आयात करीब 1.80 लाख टन रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मात्रा जुलाई के लगभग 2.50 लाख टन के मुकाबले करीब 28 फीसदी कम हो सकती है।
इसके अलावा अगस्त-सितंबर में करीब 1.50 लाख टन सूरजमुखी तेल की खेप देरी से पहुंचने की संभावना भी बताई गई है। इससे घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता पर दबाव बन सकता है।
यही वजह है कि खाद्य तेल के आयातक दूसरे विकल्पों की ओर देख रहे हैं और सोयाबीन तेल की मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
दक्षिण भारत में सोयाबीन तेल की मांग बढ़ी
दक्षिण भारत में सूरजमुखी तेल की खपत काफी ज्यादा है। लेकिन सप्लाई प्रभावित होने के कारण कुछ खरीदार अब सोयाबीन तेल की ओर रुख कर रहे हैं।
कांडला और JNPT जैसे प्रमुख बंदरगाहों के अलावा दक्षिण भारत के कुछ बंदरगाहों पर भी सोयाबीन तेल की खेप पहुंचने की बात सामने आई है।
इस बदलाव का असर आने वाले दिनों में भारत के खाद्य तेल आयात के आंकड़ों पर दिखाई दे सकता है।
कीमतों में भी बड़ा अंतर
सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के बीच अंतरराष्ट्रीय कीमतों का फर्क भी इस समय बाजार के लिए अहम है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन तेल का पाम तेल पर प्रीमियम अब घटकर करीब 50 डॉलर प्रति टन रह गया है, जबकि सूरजमुखी तेल करीब 200 डॉलर प्रति टन के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है।
इस बड़े अंतर के कारण भी खरीदारों के लिए सोयाबीन तेल अपेक्षाकृत आकर्षक विकल्प बन रहा है।
अगर सूरजमुखी तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती है और कीमतों का अंतर इसी तरह बना रहता है, तो सोयाबीन तेल की मांग को आगे भी सहारा मिल सकता है।
सितंबर में भी आयात ऊंचा रहने की उम्मीद
बाजार की नजर सिर्फ अगस्त पर नहीं है। रिपोर्ट में सितंबर महीने के दौरान भी भारत का सोयाबीन तेल आयात 6 लाख टन से ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है।
सितंबर से दिसंबर की शिपमेंट के लिए भारत द्वारा करीब 14 लाख टन सोयाबीन तेल की खरीद किए जाने की बात भी सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि आयातक आने वाले महीनों की जरूरत को देखते हुए पहले से खरीदारी कर रहे हैं।
अमेरिका, चीन, मिस्र, थाईलैंड और तुर्की के अलावा भारत की ओर से भी सोयाबीन तेल की खरीदारी पर नजर बनी हुई है।
घरेलू उत्पादन भी बाजार के लिए अहम
आयात बढ़ने की कहानी के साथ घरेलू तिलहन उत्पादन की स्थिति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मौसम में बदलाव और अल नीनो से जुड़ी चिंताओं के कारण घरेलू तिलहन उत्पादन को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। यदि घरेलू उत्पादन उम्मीद से कमजोर रहता है, तो आयात पर निर्भरता और बढ़ सकती है।
गुजरात में इस साल खरीफ फसलों के रकबे में भी बदलाव आया है। सोयाबीन का क्षेत्र पिछले साल से बढ़ा है, जबकि कुछ अन्य तिलहन फसलों में कमी दर्ज हुई है। गुजरात की पूरी खरीफ तस्वीर के लिए गुजरात खरीफ फसल क्षेत्र की रिपोर्ट देख सकते हैं।
सोयाबीन बाजार पर भी इसका असर
सोयाबीन तेल की बढ़ती मांग का सीधा संबंध सोयाबीन क्रशिंग और घरेलू सोयाबीन बाजार से है। यदि तेल की कीमतों को बेहतर सपोर्ट मिलता है तो प्रोसेसिंग इकाइयों की खरीदारी पर भी असर पड़ सकता है।
हाल में अमेरिकी बाजार में सोयाबीन और सोया तेल में भी जोरदार हलचल देखने को मिली है। CBOT में मौसम संबंधी चिंताओं के कारण सोयाबीन कॉम्प्लेक्स मजबूत हुआ था। CBOT सोयाबीन बाजार की रिपोर्ट में अमेरिकी बाजार की पूरी तस्वीर दी गई है।
इसलिए भारतीय बाजार में सोयाबीन की दिशा देखते समय घरेलू मांग के साथ अंतरराष्ट्रीय सोया तेल और सोयाबीन के भावों को भी साथ में देखना जरूरी रहेगा।
खाद्य तेल बाजार में अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल बाजार में तीन बातें एक साथ काम करती दिखाई दे रही हैं।
पहली, सूरजमुखी तेल की सप्लाई में रुकावट।
दूसरी, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के बीच बड़ा कीमत अंतर।
और तीसरी, भारतीय आयातकों की आने वाले महीनों के लिए बढ़ी हुई खरीदारी।
इन तीनों कारणों से अगस्त और सितंबर में सोयाबीन तेल का आयात सामान्य से ऊपर रहने की संभावना बन रही है।
हालांकि आयात बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू सोयाबीन की कीमतों में निश्चित रूप से तेजी आएगी। क्रूड पाम ऑयल, घरेलू मंडी आवक, रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार भी भाव पर असर डालेंगे।
दूसरे कमोडिटी बाजारों का रुख भी महत्वपूर्ण
इस समय कृषि जिंसों में बाजार की चाल काफी अलग-अलग दिखाई दे रही है। कुछ बाजारों में मांग के कारण मजबूती है तो कुछ में सप्लाई और मुनाफावसूली का दबाव है।
डेली कमोडिटी मार्केट क्लोजिंग रिपोर्ट में NCDEX और MCX पर धनिया, जीरा, काली मिर्च, हल्दी और इलायची समेत प्रमुख जिंसों की हालिया चाल देखी जा सकती है।
ग्वार बाजार में भी हाल के कारोबार में तेजी दिखाई दी है। ग्वार और ग्वार गम की क्लोजिंग रिपोर्ट में ग्वार कॉम्प्लेक्स के प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट और बाजार स्तर दिए गए हैं।
बड़ी इलायची से लेकर खाद्य तेल तक, सप्लाई बनी अहम कड़ी
कृषि और कमोडिटी बाजार में इस समय सप्लाई से जुड़ी खबरों का असर काफी तेजी से दिखाई दे रहा है। बड़ी इलायची की नीलामी में भी अलग-अलग बाजारों के बीच भाव में अच्छा अंतर देखने को मिला था। बड़ी इलायची नीलामी की ताजा रिपोर्ट में सिलीगुड़ी, सिंगतम और गंगटोक के भावों की तुलना दी गई है।
खाद्य तेल बाजार में भी यही बात महत्वपूर्ण है—जहां जिस तेल की उपलब्धता कम होती है, वहां खरीदार दूसरे विकल्प की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं।
आगे बाजार में क्या देखना होगा?
आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा नजर सूरजमुखी तेल की वास्तविक आवक और ब्लैक सी क्षेत्र से सप्लाई पर रहेगी।
इसके अलावा सोयाबीन तेल की आयातित खेप कितनी मात्रा में भारत पहुंचती है, घरेलू तिलहन फसलों की स्थिति कैसी रहती है और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार किस दिशा में जाता है—इन सभी का असर बाजार पर पड़ेगा।
अगर सूरजमुखी तेल की सप्लाई लंबे समय तक कमजोर रहती है, तो सोयाबीन तेल की मांग में मजबूती बनी रह सकती है। वहीं सप्लाई सामान्य होने पर दोनों तेलों के बीच कीमत का अंतर कम हो सकता है और सोयाबीन तेल की अतिरिक्त मांग भी कुछ नरम पड़ सकती है।
निष्कर्ष
अगस्त में भारत का सोयाबीन तेल आयात करीब 6.20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान इस समय खाद्य तेल बाजार की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में से एक है।
सूरजमुखी तेल की सप्लाई में रुकावट, दोनों तेलों के बीच कीमत का बड़ा अंतर और भारतीय आयातकों की आगे की खरीदारी इसके पीछे प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
सितंबर में भी आयात ऊंचा रहने की संभावना है। हालांकि आगे की तस्वीर काफी हद तक सूरजमुखी तेल की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल कीमतों, घरेलू तिलहन उत्पादन और मौसम पर निर्भर करेगी।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि सूरजमुखी तेल की कमी ने भारतीय बाजार में सोयाबीन तेल के लिए जगह बढ़ा दी है और आने वाले महीनों में इस बदलाव पर कारोबारियों की नजर बनी रहेगी।
स्रोत: उपलब्ध 18 अगस्त 2026 की बाजार रिपोर्ट एवं आयात संबंधी आंकड़े।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध बाजार जानकारी और रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। आयात, कीमत और बाजार की स्थिति में बदलाव संभव है। इसे निवेश या खरीद-बिक्री की निश्चित सलाह न माना जाए। व्यापारिक निर्णय अपने विवेक और जोखिम क्षमता के अनुसार लें।
