मक्का निर्यात में बड़ा उछाल, वियतनाम और बांग्लादेश की खरीद ने बढ़ाई रफ्तार

 

मक्का निर्यात में बड़ा उछाल, वियतनाम और बांग्लादेश की खरीद ने बढ़ाई रफ्तार

मक्का निर्यात में बड़ा उछाल, वियतनाम और बांग्लादेश की खरीद ने बढ़ाई रफ्तार

19 अगस्त 2026 | अप्रैल-जून 2026 के निर्यात आंकड़ों पर नजर

भारत से मक्का के निर्यात कारोबार में इस साल अप्रैल से जून के बीच काफी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में कुल 7,81,685 मीट्रिक टन मक्का अलग-अलग देशों को भेजा गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में निर्यात 1,26,575 मीट्रिक टन था।

यानी एक साल में कुल निर्यात करीब 5.18 गुना बढ़ गया। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान वियतनाम का रहा। इसके बाद बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे बाजार भी भारतीय मक्का के बड़े खरीदार बनकर सामने आए।

वियतनाम सबसे बड़ा खरीदार बना

अप्रैल-जून 2026 के आंकड़ों में वियतनाम 3,86,263 मीट्रिक टन के साथ सबसे ऊपर रहा।

पिछले साल इसी अवधि में वियतनाम को केवल 572 मीट्रिक टन मक्का भेजा गया था। इस बार इसमें जबरदस्त उछाल आया है।

कुल निर्यात में वियतनाम की हिस्सेदारी भी सबसे बड़ी रही। अकेले इस देश को भेजी गई मात्रा कुल 7.81 लाख टन निर्यात का करीब आधा हिस्सा बनाती है।

यह बदलाव भारतीय मक्का के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में बढ़ती मांग की ओर इशारा करता है।

बांग्लादेश की खरीद भी काफी बढ़ी

बांग्लादेश इस सूची में दूसरे स्थान पर रहा। अप्रैल-जून 2026 के दौरान वहां 1,36,401 मीट्रिक टन मक्का निर्यात हुआ।

पिछले वर्ष इसी अवधि में यह मात्रा सिर्फ 263 मीट्रिक टन थी। यानी बांग्लादेश की खरीद में भी इस साल बहुत बड़ा अंतर आया है।

वियतनाम और बांग्लादेश को मिलाकर ही भारतीय मक्का का निर्यात 5.22 लाख टन से ज्यादा बैठता है।

फिलीपींस की जून में बड़ी खरीद

फिलीपींस का कुल अप्रैल-जून आंकड़ा 45,658 मीट्रिक टन रहा। इसमें जून महीने की खरीद खास तौर पर बड़ी रही, जब वहां करीब 44,279 मीट्रिक टन मक्का भेजा गया।

इससे साफ है कि जून में फिलीपींस भारतीय मक्का के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनकर उभरा।

मई में वहां 750 टन और अप्रैल में 629 टन की मात्रा दर्ज की गई थी।

UAE भी तेजी से आगे आया

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE को अप्रैल-जून के दौरान 61,461 मीट्रिक टन मक्का निर्यात किया गया।

इसमें मई और जून की खरीद का बड़ा योगदान रहा। मई में 30,312 टन और जून में 30,038 टन मक्का UAE भेजा गया।

पिछले वर्ष इसी अवधि में UAE को केवल 1,329 टन निर्यात हुआ था। इस लिहाज से इस बाजार में भी भारतीय मक्का की खरीद में बड़ा विस्तार दिखाई देता है।

नेपाल में उलटी तस्वीर

जहां ज्यादातर देशों की खरीद बढ़ी, वहीं नेपाल का आंकड़ा कुछ अलग रहा।

अप्रैल-जून 2026 में नेपाल को 66,874 मीट्रिक टन मक्का निर्यात हुआ। पिछले साल इसी अवधि में यह मात्रा 83,456 मीट्रिक टन थी।

यानी नेपाल की खरीद में करीब 20 फीसदी की कमी आई।

इससे यह भी पता चलता है कि भारतीय मक्का की निर्यात कहानी हर बाजार में एक जैसी नहीं है। कुछ देशों से बड़ी मांग आई है, जबकि कुछ पारंपरिक बाजारों में खरीद कम हुई।

बाकी देशों में भी तस्वीर मिली-जुली

भूटान को इस अवधि में 12,184 मीट्रिक टन मक्का भेजा गया, जबकि पिछले वर्ष यह 8,896 टन था।

थाईलैंड में कुल निर्यात 2,264 टन रहा, जो पिछले साल के 728 टन से ज्यादा है।

श्रीलंका को इस साल 2,988 टन निर्यात हुआ, जबकि पिछले साल यह 18,302 टन था। यानी वहां भारतीय मक्का की खरीद काफी कमजोर रही।

सोमालिया को 2,056 टन और अन्य देशों को मिलाकर करीब 41,700 टन निर्यात दर्ज किया गया।

अप्रैल से जून तक महीनेवार तस्वीर

कुल 7.81 लाख टन निर्यात में तीनों महीनों का योगदान इस प्रकार रहा—

महीनामक्का निर्यात
अप्रैल 20261,92,887 MT
मई 20263,01,580 MT
जून 20262,87,217 MT
कुल7,81,685 MT

मई में निर्यात सबसे ज्यादा रहा। जून में भी करीब 2.87 लाख टन की मात्रा के साथ निर्यात मजबूत बना रहा।

इस आंकड़े का घरेलू मक्का बाजार पर क्या असर?

निर्यात में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार की सप्लाई और मांग दोनों पर पड़ सकता है।

अगर निर्यात सौदे लगातार इसी गति से चलते हैं तो देश के कुछ इलाकों में उपलब्ध मक्का का एक हिस्सा बाहरी बाजार में चला जाएगा। इससे घरेलू खरीदारों को माल जुटाने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है।

हालांकि घरेलू भाव पर सिर्फ निर्यात का असर नहीं होता। नई फसल का रकबा, मंडी आवक, पोल्ट्री और स्टार्च उद्योग की मांग, इथेनॉल सेक्टर की खरीद और किसानों के पास बचा स्टॉक भी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

कृषि बाजार में सप्लाई का महत्व बढ़ा

मक्का के निर्यात में यह बदलाव ऐसे समय आया है जब कृषि जिंसों में उत्पादन और उपलब्धता को लेकर बाजार लगातार आंकड़ों पर नजर रख रहा है।

गुजरात की खरीफ फसलों के हालिया आंकड़ों में भी कई फसलों के रकबे में बदलाव देखने को मिला है। गुजरात खरीफ फसल क्षेत्र की पूरी रिपोर्ट में प्रमुख फसलों के इस साल और पिछले साल के क्षेत्र की तुलना दी गई है।

दूसरे कमोडिटी बाजारों की चाल भी देखें

मक्का के साथ-साथ दूसरे कृषि जिंसों में भी इन दिनों अलग-अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं। 18 अगस्त की NCDEX क्लोजिंग रिपोर्ट में धनिया, जीरा, हल्दी और दूसरी प्रमुख कमोडिटी के हालिया भावों की जानकारी मिलती है।

ग्वार बाजार में भी हाल में तेज खरीदारी देखने को मिली है। ग्वार और ग्वार गम की क्लोजिंग रिपोर्ट में ग्वार कॉम्प्लेक्स की ताजा चाल और प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं।

खाद्य तेल बाजार से भी जुड़ा है मांग का समीकरण

मक्का के अलावा सोयाबीन और खाद्य तेल बाजार में भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार का असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है। भारत में सोयाबीन तेल के आयात में बढ़ोतरी की संभावना से खाद्य तेल बाजार की तस्वीर बदल रही है।

सोयाबीन तेल आयात की ताजा खबर में अगस्त और सितंबर के संभावित आयात से जुड़े आंकड़ों और सूरजमुखी तेल की सप्लाई की स्थिति की जानकारी दी गई है।

आगे किन बातों पर नजर रहेगी?

मक्का के मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या निर्यात की यह रफ्तार आगे भी बनी रहती है।

अगर वियतनाम, बांग्लादेश, UAE और फिलीपींस जैसे खरीदार भारतीय मक्का की खरीद जारी रखते हैं तो निर्यात मांग को अच्छा सहारा मिल सकता है।

दूसरी तरफ घरेलू बाजार में नई फसल की आवक बढ़ने पर सप्लाई का दबाव भी बन सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में निर्यात सौदे, घरेलू मंडी आवक और उद्योगों की मांग तीनों को साथ देखकर बाजार की दिशा समझना बेहतर रहेगा।

एक नजर में बड़ी बातें

  • अप्रैल-जून 2026 में कुल मक्का निर्यात 7,81,685 MT रहा।

  • पिछले साल इसी अवधि में निर्यात 1,26,575 MT था।

  • वियतनाम 3,86,263 MT के साथ सबसे बड़ा खरीदार रहा।

  • बांग्लादेश को 1,36,401 MT मक्का भेजा गया।

  • UAE की खरीद 61,461 MT रही।

  • फिलीपींस को 45,658 MT निर्यात हुआ।

  • नेपाल की खरीद पिछले साल के मुकाबले कम रही।

  • मई में सबसे ज्यादा 3,01,580 MT मक्का निर्यात हुआ।

निष्कर्ष

अप्रैल-जून 2026 के आंकड़े भारतीय मक्का के निर्यात कारोबार में बड़ा बदलाव दिखाते हैं। कुल मात्रा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कई गुना बढ़ी है और वियतनाम इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है।

बांग्लादेश, UAE और फिलीपींस की खरीद भी बढ़ने से भारतीय मक्का के लिए विदेशी बाजार का दायरा मजबूत हुआ है। हालांकि नेपाल और श्रीलंका जैसे कुछ बाजारों में खरीद कम रही है।

अब आगे की तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी खरीदारों की मांग कितनी देर तक बनी रहती है और घरेलू बाजार में नई फसल आने के बाद उपलब्धता कैसी रहती है।

स्रोत: 19 अगस्त 2026 को उपलब्ध कराए गए अप्रैल-जून 2026 के मक्का निर्यात आंकड़े।

Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आंकड़ों की व्याख्या पर आधारित है। निर्यात, मांग, आवक और बाजार भाव में समय के साथ बदलाव हो सकता है। इसे निश्चित खरीद-बिक्री या निवेश सलाह न माना जाए।

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